समर्पण ब्लॉग में आपका स्वागत हैं मुझे आशा हैं आपको मेरी लिखी कवितायेँ पसंद आएँगी आप से अनुरोध हैं कृपया ब्लॉग के सभी पेज की पोस्ट ज़रूर देखें 'पढ़ें और कमेंट करें 'आप का स्नेह और साथ ऐसे ही बना रहें ....आप मुझे फेसबुक और ट्विटर पर भी follow कर सकते हैं

Wednesday, 19 August 2020

हाय हाय ये मज़बूरी

 

''हाय हाय ये मज़बूरी।

ये कट्टरपंथों की जी हुजूरी।

''ये जिहाद इन्हें ललचायें।

हर छोटी-छोटी बातों पे ।

रोज़ नया फतवा आयें।

‘’हाय हाय ये मज़बूरी।

ये कट्टरपंथों की जी हुजूरी।.............

‘’कितने बम फोड़े इन्होनें।-2

अब खुद को ही बम से उड़ायें।

''72 हूरों की चाह में।

ये रोज़ जन्नत को जायें।....

''सभी मुल्ला ‘क़ाज़ी ‘और मौलाना।

इन्हें यही रास्ता हैं दिखाएँ।....... 

‘’हाय हाय ये मज़बूरी।

ये कट्टरपंथों की जी हुजूरी।.............

''आतंकवाद और जिहाद का बंधन हैं।

जो सेकुलरवाद से भी ना टूटे।

''जिहादी का है क्या भरोसा। 

आज गले मिले ‘ कल लुटे।

''अरे गजवा ऐ हिन्द हैं उसका मकसद।

फिर भी तु ना समझ पायें।

''हर छोटी-छोटी बातों पे।

वो इस देश को जलायें।....... 

‘’हाय हाय ये मज़बूरी।

ये कट्टरपंथों की जी हुजूरी।.............

**********राजेश कुमार ’’आतिश’’**********

2 comments:

  1. शानदार कविता वाह!

    ReplyDelete
    Replies
    1. शुक्रिया नितिन भाई

      Delete