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Saturday, 2 May 2020

'हे जननी जन्मभूमि प्रणाम हैं तुम्हे।


''हे जननी जन्मभूमि प्रणाम हैं तुम्हे। 
यह सम्पूर्ण जीवन ही बलिदान हैं तुम्हे। 
''चरित्र संस्कार और त्याग से परिपूर्ण हों। 
ऐसे व्यक्तित्व का करना निर्माण हैं हमें। 

''युद्ध जीत नहीं सकता हैं तू गर झूठ की कमान हों। 
जीतता हैं जो जो प्रहार करता हैं जब सत्य का बाण हो। 
 ''फिर राणा का जन्म हो 'नारी का झाँसी सा सम्मान हों। 
और शोर्य चन्द्रगुप्त का विवेकानंद सा ज्ञान हो। 

''उन टूटे शिलालेखो का फिर से आलेख हों। 
उन महावीर बलिदानियों का फिर से अभिषेक हों। 
''विश्व की धरा पर राष्ट्र का यश गान हो। 
अपनी संस्कृति पर हमको फिर से अभिमान हों। 

''लेंगे प्रभु अवतार यहीं 'मानव जाती का कल्याण हों। 
 हर जन्म मेरा इस मात्रभूमि पर बलिदान हों। 
''जीवन होगा सार्थक सिर्फ समर्पण से 
हर व्यक्ति में जागृत कुछ ऐसा स्वाभिमान हों। 

**********राजेश कुमार ’’आतिश’’**********

3 comments:

  1. Bahut badiya Rajesh Bhai...Anand aa gaya.

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद जीतू भाई समय निकाल के और भी पढ़ना .अभी बहुत सी पोस्ट नहीं किया हूँ अपना साथ ऐसे ही बनाये रखना जय श्री राम वन्दे मातरम

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  2. बहुत अच्छा लिखा ह भाई

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