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Sunday, 19 April 2020

भारत महान की



''बंधी थी जिनसे उम्मीद भारत महान की। 
धज्जियां उड़ा दी उन्होंने ही संविधान की। 
''भूल गयें ,जो मर्यादा रामायण की। 
दावे करते हैं,वह खुद के होने चरित्रवान की। 

''करते हैं कमाई वो सिर्फ ''हराम''की। 
तमन्ना हैं इनको ना ' जाने किस जहान की। 

''इनकी नीतियों में पीस गई ,ज़िन्दगी आम इन्सान की। 
फिर भी आश्वासन देतें हैं ,हर बार नयें निर्माण की। 
''आंकी नहीं जाती ,कभी कीमत बलिदान की। 
तमन्ना होती हैं ''सरफरोशों को सिर्फ सम्मान की। 

**********राजेश कुमार ’’आतिश’’**********

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