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Sunday, 26 April 2020

आज सब मौन हैं


''आज मन छुब्ध हैं। 
अंतर्मन भी क्रुद्ध हैं। 
''संन्यास के दमन पर 
भू से गगन पर 
''विश्वपटल गौण हैं 
आज सब मौन हैं। 

''संत के संहार पर 
इनके दुर्व्यवहार पर 
''ना ही कहीं शोर हैं। 
ना कोई भावविभोर है। 
''भूल गए सब की यह कौन हैं। 
आज सब मौन हैं। 

''भेडियों का झुण्ड खड़ा हैं। 
रक्त विछिप्त शव पडा हैं। 
''ना शोक है ना भाव हैं। 
यह बहुत गहरा घाव हैं। 
शस्त्र शिक्षा दे जो 'कहाँ ऐसे द्रोंण हैं। 
आज सब मौन हैं। 

''ना पीड़ा है ना मर्म हैं 
यह कैसा धर्म है।
''पूछता हैं भारत 'की दोषी कौन हैं। 
आज सब मौन हैं 

''अब ना कोई लागलपेट हो। 
ना बातचीत के छंद हो। 
''बस एक ही  विकल्प है। 
दोषियों को प्राण दंड हो। 

*************राजेश कुमार "आतिश"*************


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