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| अब भी जो साथ ना दे वो ना वतन का हैं ना हमारा हैं। |
''भारत के युवाओं ने भरली अब हुंकार हैं।
ये गरजना नहीं यह ' युद्ध
की ललकार हैं।
''इनके कपटी दिल नहीं जो ,जो टुकड़ों में बिक जाते हैं।
ये वो निश्छल फूल हैं 'जो काँटों में भी खिल जाते हैं।
''ये वो किलकारी नहीं ' जो सीने में छुप जाती हैं।
ये ऐसी दहाड़ हैं जो दुश्मनों ' के दिल हिलाती हैं।
''रक्त वंचित भालो से दुश्मन को मार गिराना हैं।
उन सुख चुकी तलवारों को 'आज फिर से लहू चखाना हैं।
''सरहद के उस पार से जब दुश्मन कदम बढाता हैं।
माँ भारती का सीना ' दर्द से करहाता हैं।
''उन व्यर्थ हंसी ठीठोलियों का राग पुराना हो जाने
दो।
इन धीमी रक्त नलिकाओं में' आज उबाल तो आने दो।
''ये बात नहीं बताने की ' कि देश को हमे बचाना हैं।
ये वक़्त हैं निर्णय लेने का हमको ही कदम उठाना
हैं।
''इन निश्चल मन के भावो का भावार्थ बड़ा ही गहरा हैं।
इस जन आक्रोश के आगे कौन कहाँ कब ठहरा हैं।
''हर गली हर नगर में गूंज रहा'एक ही नारा हैं।
*************राजेश कुमार "आतिश"**************

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